चोरों का दो महीने में तीसरा धरना। पार्किंग से चोरियां कम होने पे नाराज़। सरकार की तरफ से चुप्पी।


मोटरसाइकिल चोर एसोसिएशन (एम्म सी ए) का धरना आज अपने चौथे दिन मैं पहुंच गया है।भारी भीड़ मैं दिल्ली के आस पास के इलाकों से आये चोरों ने सरकार से अपनी प्रथा दिखने के लिए यह आंदोलन शुरू किया है।

नॉएडा से आये बिट्टू मिस्त्री, जो की महीने की बारह गाड़ियां निकाल लिया करते थे, ने बताया की उनका जीवन अस्त व्यस्त हो गया है और उनके सरकार मैं बैठे प्रतिनिधि सुनने के लिए तैयार नहीं है।

वहीँ दुरसी तरफ पप्पू शर्मा की माने तो जून के बाद से घर मैं मातम सा छा गया है, “पहले महीने की 2 – 3 मोटरसाइकिल निकाल लेते थे, मेरे चाचा के लड़के भी थे इसी लाइन मैं। उन्हें सिखाया था साबुन से चाबी बनाना, ताले पे हथोड़े से चोट मारना, पर अब तो ऐसा लगता है की अपने पास कोई ही नहीं है। बच्चों के स्कूल है, बीवी का इलाज है। कहा से करें ये सब?”

दिल्ली की प्रसिद्ध चोर बाजार के प्रेजिडेंट ने भी मुक्यमंत्री को चिट्ठी लिखते हुए अपने और अपने मार्किट के लोगों का जायज़ा दिया और आग्रह किया की वह कुछ कड़े कदम जल्द से जल्द उठाएं।

इसी बीच इस मामले को लेकर सियासत गरम होती हुई दिख नहीं रही है। दोनों सरकार और ओप्पोसिशन का यही कहना है की, “हमारे हाथ बन्दे हुए हैं।” ओप्पोसिशन लीडर तोह “नो कमैंट्स” कह आगे कुछ बोले ही नहीं।

ये तो कहा नहीं जा सकता की यह धरना कब तक चलेगा क्यूंकि पुरानी बाइक्स तो जा चुकी है और आने वाले कल मैं भी नहीं आने वाली है वापस। क्योंकि 18 जून 2019 के बाद से गाडी चुराने का ख्याल भी पुराना हो गया है।

एक मशहूर कवी ने ज़रूर कहा है, “गुज़रा हुआ ज़माना अपने साथ साथ बहुतों को ले जाता है।” ये अब इन चोरों को कौन समझाएं।