दिल्ली-6 के स्क्रैप डीलर्स ने पुरानी मोटरसाइकिल बेच के खोली नयी कंपनी “पुराना खज़ाना”


“मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती । मेरे देश की धरती”

1967 की पुकार फिल्म का यह गीत न जाने कितने देशवासियों के दिल मैं जोश और राष्ट्रवाद की ज्वाला जला देता है। पर, जब इस गीत के शब्द आपकी ज़िन्दगी मैं एक मिसाल बनके पेश हो जाएँ तब यह पता लगता है की इस देश की धरती से सोना निकलने वाले भी काम नहीं है। 

ऐसा ही एक नज़ारा दिल्ली -6 के कुछ स्क्रैप इकठा करने वालों ने दिखाया, जिन्होंने अपनी कंपनी खड़ी करके ‘Entrepreneur’ शब्द को एक नया मायने दिया है। शहर की पुराने फेंकी हुई लोहे की बाइक्स को रीसायकल करके उनको स्टेशनरी, डस्टबिन और घर के फर्नीचर में बदल दिया है।कुछ कलाकारी कर्मचारियों ने तो इनके पुतले भी बना दिए जो अब इंटरनेट पे नीलाम हो रहे है।

अपने नए बिज़नेस के बारे में बात करते हुए, PKEL के चेयरमैन मुकेश शर्मा जी ने बताया की , “18 जून 2019 के बाद से इतना माल मिला सड़को पे तो हमने सोचा की इससे कुछ नया धंदा चलाएं। हमने 20 लोगों से शुरुआत की थी “।

“हमारे लोग 20 से कब 200 हुए यह तोह भगवान् की ही कृपा है ”।

इनकी तरक्की और विशवास देख दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी इनकी प्रशंसा की और खुद नयी फैक्ट्री का उद्धघाटन करने पहुंचे।

“हमें नाज़ इस देश की मिटटी पे और इस देश की मिटटी के पुत्रों पे, आप कहाँ तक बढ़ते हैं इसकी कोई सीमा नहीं होती। सपने जागते हुए देखने चाहिए, सोते हुए तो सभी देखते हैं”

मुख्यमंत्री ने उद्घाटन के बाद फैक्ट्री का जायज़ा भी लिया और खूब प्रोत्साहन देते हुए कंपनी के लोगों के साथ बैठ के लंच भी किया”।